जीवन में एक पौधा जरूर लगाएं,,, यह हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी : दीपक तिवारी

# Admin | 11 Jul, 2021

जीवन में एक पौधा जरूर लगाएं,,, यह हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी : दीपक तिवारी

मिशन क्रांति न्यूज.जांजगीर - चाम्पा। ग्राम तिलई के युवा समाज सेवक दीपक तिवारी ने पौधरोपण पर जोर देते हुए सभी को पौधे लगाने की अपील की। उन्होंने खुद पौधरोपण करते हुए जीवन में पौधे की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।

दीपक तिवारी जांजगीर के एक निजी हाईस्कूल में शिक्षक हैं और लंबे समय से जनकल्याण और प्रकृति पर्यावरण के लिए कार्य कर समाज को जागरूक करने का कार्य करते आ रहे हैं। इसी परिपेक्ष्य में रविवार को अपने घर के पास पुरैना तालाब किनारे पीपल का पौधा लगाया और लोगों पेड़ पौधा लगाने प्रेरित किया । गौरतलब है कि युवा समाज सेवी व लेखक दीपक तिवारी की समाजहित में लंबे समय से विशेष भूमिका रहा है। इससे पहले वह पिछले दस वर्षों से स्वयं के खर्चे पर पंक्षी - पर्यावरण संरक्षण अभियान चला रहे हैं और गर्मी में पंछियों को बचाने और उन्हें सुरक्षित रखने निःशुल्क मिटटी के सकोरे ,दाने के पैकेट ,पाम्पलेट व लकड़ी का घोसला बाटते हैं । हाल ही में उन्होंने समाज को जागरूक करने लॉक डाउन के समय को लोकहित में लगाते हुए बेटी शिक्षा ,सुरक्षा ,सम्मान ,समानता ,व कन्या भ्रूण हत्या पर पुस्तक लिखा था और इसका विमोचन छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने किया था ,और दीपक के कार्यों की अपने रायपुर स्थित निवास में प्रशंसा भी की थी । पौधरोपण के दौरान दीपक ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि - मनुष्य के बिना पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं, वायुमंडल का जीवन संभव है, परंतु मनुष्य का जीवन इनके बिना असंभव है। क्यों, क्योंकि सामान्यतः तीन मिनट तक वायु न मिले, तो मनुष्य मर जाता है.. वायुमंडल, जल मंडल (समुद्र, नदी, नाले, तालाब, झीलें), पहाड़-घाटियाँ, बर्फीले और रेतीले मैदान, लंबे-चौड़े सपाट मैदान, घने जंगल, हजारों तरह के अरबों-खरबों पेड़-पौधे और जीव-जंतु थे। धरती माता हमें एक बीज के बदले लाखों अन्न के दाने या फल देती है। और हम है के अन्नपूर्णा मां के पेट में केमिकल रासायनिक दवाई कूड़ा-करकट, नष्ट न होने वाला कचरा, पॉलिथीन व प्लास्टिक के पाउच ठूँसकर हम अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। हमे सभी को इस पर निश्चित ही जागरूक होने की आवश्यकता है..

वृक्ष ने मनुष्य को प्राणवायु, जल, छाया, रोटी-कपड़ा, मकान, फर्नीचर, दवा, कागज, स्याही, रंग, कॉस्मेटिक्स, शराब, औजार, सुगंधित पदार्थ आदि सैकड़ों तरह के वरदान तो दिए ही हैं। वृक्ष स्वंय शोर और वायु प्रदूषण के जहर को स्वयं पी जातें हैं। वृक्ष बरसात के जल को अपनी जड़ों के माध्यम से धरती के भीतर तक पहुँचाते हैं। पौधे की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है। सभी को मिलकर प्रकृति की रक्षा और पर्यावरण के संतुलन बनाए रखने में सहयोग की जरूरत है।

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